Wednesday, December 20, 2017

याद है मुझे तेरी और मेरी वह मुलाकात !!!

वो तेरे चेहरे पर जो थे केश,
वो तेरा शुद्ध देशी भेष,
वो कोमल हथेलियो के नाजुक स्पर्श,
मेरे मन में जिसने भरा था हर्ष,
वो तेरा रास, वो मेरी आस,
याद है मुझे तेरी और मेरी वह मुलाकात !!!

चहकती हुई तेरी वाणी,
मेरे सामने थी खड़ी-
मृग-नयनी सुन्दर नारी,
मेरी आँखों की वो रंगीनिया,
तेरी बाहो की वो अठखेलियां,
वो तेरा मटकना, वो मेरा बहकना
आज भी जो है मेरे लिए खास,
याद है मुझे तेरी और मेरी वह मुलाकात !!!

वो नृत्य की कलाकृतिया,
वो शब्द की अभिव्यक्तियां,
वो साँझ का बैचैन सुहावना समां,
वो बेठे थे किनारे पर दो दिल जवां,
वो जो आँखों में थी तड़प,
वो जो होंठो पे था रस,
हो चूका था इश्क़ का आगाज,
याद है मुझे तेरी और मेरी वह मुलाकात !!!

आकर्षण था जोरो पर,
मन था उछाल मार रहा,
जो सुनी थी बाते किस्सों में,
महसूस उन्हें था आज कर रहा,
मेंरी आँखों ने जब इशारा किया,
तेरे होठो ने जब साथ दिया,
बहक उठा मन बावला,
बन गई मुलाकात कुछ खास,
याद है मुझे तेरी और मेरी वह मुलाकात।


-Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"

Thursday, November 9, 2017

मैं कोई ख़ास नहीं, मैं आम हूँ !!

ना रजत की चमक लेकर हु बड़ा हुआ,
ना शानो शौकत की परवाज़ मैं हूँ चड़ा हुआ,
मोहल्ले, गलियों, बाजारों में ही मैं पला बड़ा,
मैं कोई ख़ास नहीं, मै आम हूँ |
उन्ही संघर्षो से गुजरता एक नादान हूँ ||

हाथ मैं ना कोई सफलता लेकर पैदा हुआ,
ना ही वंशजो के धन पर हु निर्भर बैठा हुआ,
पुरजोर मशक्कत करके इस मुकाम पर हु खड़ा हुआ,
मैं कोई ख़ास नहीं, मै आम हूँ |
उन्ही संघर्षो से गुजरता एक नादान हूँ ||

ना मैं कोई बादशाह हूँ, ना मिलकियत का वारिस,
दिलो पर राज करना ही है तमन्ना मेरी,
प्यार और सम्मान की चाहत लिए घूम रहा
मैं कोई ख़ास नहीं, मै आम हूँ |
उन्ही संघर्षो से गुजरता एक नादान हूँ ||

Vaibhav Gadia "Donate Eyes, So one can see the World after you"

Friday, November 3, 2017

Virtual Diwali...Virtual Emotions.

Strange but true...
This diwali was very special for me, Almost 800 people wished me on whatsapp through 10387 messages in group and personal chats, Around 500 people liked my pic and commented on fb,insta,snapchat,hike etc.
I was very busy in replying to all those people but the most fantastic thing of this Diwali is that I don't remember a single name and wishes from any of those people. It was a thing that made me celebrity for doing nothing and just having an internet connection on my smartphone and do u know even after thousand of messages, I feel myself alone.
Less phonecalls on this diwali, Less loved one this Diwali. Nowadays we only have a virtual presence in our dear ones lives but that something which connects us, that feeling is missing. Wait for a second today and think where we are now and where wou would go.
Digital emotions gives us only digital satisfaction but our heart always want to be with my friends and family who don't just say we are with you Vaibhav Gadia but they actually mean it without saying a word..Hope you will realise the difference between Real and Virtual life..

#BeReal #BeYourself



Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"

Monday, October 30, 2017

तेरे साथ हैं खड़ा ये सारा जहाँ....

यूँ रातो को यह नींद ना आना,
दिल में कुछ बातों को दबाते जाना,
अपनी यह तड़प, किसी को भी न दिखाना,
और खाली रातों मैं यूँ थर थर्राना,
कुछ तो है तेरे मन मैं,
जो हैं तुझे सता रहा,
यूँ ही नहीं होता ये,
रातभर जागने का सिलसिला,
मन मैं जो दबा रखी हैं,
वो बात किसी को तो बता,
दिल ये तेरा आज खाली जो है,
इसको भरने के लिए कदम तो बढा,
तू देखेगा की तू अकेला है नहीं,
तेरे साथ हैं खड़ा ये सारा जहाँ |
तेरे साथ हैं खड़ा ये सारा जहाँ ||

तेरी पहचान खो रही है,
तेरी कला मिट रही है
तू अपने आप को जगा,
दुनिया को कुछ कर के दिखा,
माना हम उस दौर में खड़े है,
जहाँ कुछ भी है नहीं बचा,
पर एक सांज में तू गा जरा,
तू देखेगा की तू अकेला है नहीं,
तेरे साथ हैं खड़ा ये सारा जहाँ |
तेरे साथ हैं खड़ा ये सारा जहाँ ||


- Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"

Saturday, October 14, 2017

“संघर्ष और सफलता”

वो शुरुवाती दिन आज भी याद आते है
जब शुरू किया था चलना,
लम्हे वो तड़पाते हैं
सब ने अपने अपने मतलब निकाले
भीड़ थी पर में था अकेला
ये था संघर्ष का मोड़ पहला

धीरे धीरे जब में आगे बड़ा
कुछ अपने बेगाने से नजर आये
और कुछ बेगाने दिल को छु पाए
जो थे सच्चे वो जूठे नजर आये
जो थे गहरे उनमे एक बूंद भी ना समां पाए
जिंदगी की असलियत से जब पहचान हुई
यह संघर्ष की कहानी सभी के साथ हुई

कुछ को थी चिंता मेरी , कुछ को भरोसा था
लेकिन सच मायने में , मैं खुद भी अधूरा था
अनजाने से रास्ते थे, मंजिल का ही नहीं था ठिकाना
उठना भी था और लड़ना भी
बिना किसी का बुरा किये था आगे बढना भी
राहो मैं जो पड़ा था कंकर वो था पार कर जाना
यही तो था असली संघर्ष का ज़माना

चेहरे पर सिकन तो थी, आखें ये नरम तो थी
पर दिल में एक जज्बा लिए हम चल पड़े थे
अब तो था बस कुछ करने दिखाना
उन सभी लोगो को भी था चुप करना
जिन्होंने सताया था दे दे कर ताना
आज वो घडी भी यूँ आ गई
चेहरे पर मुस्कान छा गई , दर्द यूँ थर्रा सा गया
जब सफलता कदमो में आ गई, जाब सफलता कदमो में आ गई   


आपका ही..वैभव गादिया 

Monday, September 25, 2017

बीज हूँ साहब, मुझे आदत हैं उग जाने की....


चेहरे पर हमेशा यह मुस्कान रही,
हाथो की लकीरों से ज्यादा, मन मैं मेहनत की कमान रही,
किया है मैंने कई तूफानों का डट के सामना,
मंजिल पर हमेशा पंहुचा है मेरा ये कांरवा,
उन्होंने सोचा था मिटटी में दब जाऊँगा,
दूर कहीं हार के थक जाऊंगा,
पर लौट के हूँ आया, सबके दिलो में हूँ छाया
क्या करू?
बीज हूँ साहब, मुझे आदत हैं उग जाने की |

कई  मुश्किलों का डट के है सामना किया,
कई अल्फाजो पर खुल के हैं जवाब दिया,
राहो के कंकर को हमने पैरो में दबाया है,
दर्द हुआ पर सहन करके, परचम अपना लहराया हैं,
मिटटी मैं दबाने की उनकी हर कोशिश नाकाम हुई ,
लहरों को चीर कर यह नैया हर बार है पार हुई,
क्युकी...
बीज हूँ साहब, मुझे आदत हैं उग जाने की |

चले तो हम कारंवा लेकर ही थे,
कुछ लोगो ने किया यह छल कपट भरा कारनामा हैं,
किया भी सही तो कोई बात नहीं
हमे कहा किसी को निचा दिखाना है,
पर उनकी यह मेहनत भी बेकार हुई,
जब हुआ सवेरा तब एक नयी फसल की सौगात हुई,
यह तो होना ही था..क्युकी
बीज हूँ साहब, मुझे आदत है उग जाने की |


-Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"


Saturday, September 23, 2017

आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया..

सालो से जो दिल में दबी थी
उस आवाज को सरेआम किया..
हुआ था जो अन्याय उस पर
उसका आज पैगाम दिया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

कब तक बैठेंगे युही चुप रहके हम,
कब तक सहेंगे अधर्म के कष्टों को |
सही का कोई समय नहीं,
जो करना है आज करो ये जान लिया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

अगर कुछ बदलना है तो,
करने होंगे हौसले बुलंद
गलत के विरोध में हमने
कलम की ताक़त का शुरू उपयोग किया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

बदल के दिखाऊंगा,
मैं इस दुनिया को अब
चाहे कितनी ही मुश्किलें से हो सामना,
आज मैंने है ये ठान लिया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"