Monday, September 25, 2017

बीज हूँ साहब, मुझे आदत हैं उग जाने की....


चेहरे पर हमेशा यह मुस्कान रही,
हाथो की लकीरों से ज्यादा, मन मैं मेहनत की कमान रही,
किया है मैंने कई तूफानों का डट के सामना,
मंजिल पर हमेशा पंहुचा है मेरा ये कांरवा,
उन्होंने सोचा था मिटटी में दब जाऊँगा,
दूर कहीं हार के थक जाऊंगा,
पर लौट के हूँ आया, सबके दिलो में हूँ छाया
क्या करू?
बीज हूँ साहब, मुझे आदत हैं उग जाने की |

कई  मुश्किलों का डट के है सामना किया,
कई अल्फाजो पर खुल के हैं जवाब दिया,
राहो के कंकर को हमने पैरो में दबाया है,
दर्द हुआ पर सहन करके, परचम अपना लहराया हैं,
मिटटी मैं दबाने की उनकी हर कोशिश नाकाम हुई ,
लहरों को चीर कर यह नैया हर बार है पार हुई,
क्युकी...
बीज हूँ साहब, मुझे आदत हैं उग जाने की |

चले तो हम कारंवा लेकर ही थे,
कुछ लोगो ने किया यह छल कपट भरा कारनामा हैं,
किया भी सही तो कोई बात नहीं
हमे कहा किसी को निचा दिखाना है,
पर उनकी यह मेहनत भी बेकार हुई,
जब हुआ सवेरा तब एक नयी फसल की सौगात हुई,
यह तो होना ही था..क्युकी
बीज हूँ साहब, मुझे आदत है उग जाने की |


-Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"


Saturday, September 23, 2017

आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया..

सालो से जो दिल में दबी थी
उस आवाज को सरेआम किया..
हुआ था जो अन्याय उस पर
उसका आज पैगाम दिया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

कब तक बैठेंगे युही चुप रहके हम,
कब तक सहेंगे अधर्म के कष्टों को |
सही का कोई समय नहीं,
जो करना है आज करो ये जान लिया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

अगर कुछ बदलना है तो,
करने होंगे हौसले बुलंद
गलत के विरोध में हमने
कलम की ताक़त का शुरू उपयोग किया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

बदल के दिखाऊंगा,
मैं इस दुनिया को अब
चाहे कितनी ही मुश्किलें से हो सामना,
आज मैंने है ये ठान लिया..
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....
आज फिर मैंने, कलम को अपने हाथ लिया....

Vaibhav Gadia "Donate Blood Save Life"